Breaking News : 3 दिसंबर को पश्मी से प्रस्थान करेंगे चालदा महासू महाराज, 7 दिसंबर को मशक मंदिर में होंगे विराजमान..

ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)

शिलाई (कंवर ठाकुर ):- देव आस्था, अटूट श्रद्धा और सदियों पुरानी परंपराओं का साक्षी बनने जा रही चालदा महासू महाराज की उत्तराखंड वापसी की देवयात्रा का कार्यक्रम तय हो गया है। 3 दिसंबर को पश्मी गांव से महाराज की पावन यात्रा शुरू होगी, जो विभिन्न गांवों से होते हुए 7 दिसंबर को उत्तराखंड के मशक गांव पहुंचेगी। पांच दिनों की इस यात्रा के बाद महाराज मशक मंदिर में विराजमान होंगे। इस खबर के सामने आने के साथ ही श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल है।

चालदा महासू महाराज केवल आस्था के प्रतीक ही नहीं, बल्कि सिरमौर और उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता से भी गहराई से जुड़े हैं।महाराज की यात्रा का इंतजार श्रद्धालु विशेष श्रद्धा के साथ करते हैं। देवयात्रा के हर पड़ाव के साथ भक्तों की आस्था और परंपरा का यह सिलसिला आगे बढ़ेगा।

पांच दिन, पांच पड़ाव और अटूट आस्था का सफर
महासू देवता के बजीर दीवान सिंह ने बैठक के बाद यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम साझा किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, महाराज की यात्रा के दौरान अलग-अलग गांवों में रात्रि पड़ाव होंगे।

3 दिसंबर: पश्मी गांव से देवयात्रा का शुभारंभ होगा। यात्रा का पहला रात्रि पड़ाव द्राबील गांव में रहेगा।

4 दिसंबर: यात्रा आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड के बाइला भरम गांव पहुंचेगी, जहां दूसरी रात महाराज का प्रवास होगा।

5 दिसंबर: तीसरे दिन यात्रा का पड़ाव तिलूर खेड़ा गांव में रहेगा।

6 दिसंबर: चौथी रात कांडोई भरम गांव में महाराज का प्रवास होगा।

7 दिसंबर: पांच दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन चालदा महासू महाराज मशक गांव पहुंचेंगे और वहां के मंदिर में विराजमान होंगे।

देव परंपरा से जुड़ी भावनाएं, श्रद्धालुओं को आगमन का इंतजार..

चालदा महासू महाराज की देवयात्रा का महत्व केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। यह यात्रा उन गहरी आस्थाओं और परंपराओं को भी दर्शाती है, जो पीढ़ियों से लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं। महाराज के आगमन को श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और देव संस्कृति से जुड़े एक विशेष अवसर के रूप में देखते हैं।

पश्मी से मशक तक का यह सफर विभिन्न गांवों को आस्था की एक साझा डोर में पिरोएगा। यात्रा के दौरान पड़ने वाले गांवों में महाराज के प्रवास को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है। वहीं, 7 दिसंबर को मशक मंदिर में महाराज के विराजमान होने का क्षण इस देवयात्रा का प्रमुख पड़ाव होगा।

3 दिसंबर से शुरू होगा आस्था का सफर..

अब श्रद्धालुओं की निगाहें 3 दिसंबर पर टिकी हैं, जब चालदा महासू महाराज पश्मी गांव से अपनी यात्रा आरंभ करेंगे। पांच दिनों तक चलने वाली यह देवयात्रा सिरमौर और उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और जीवंत देव परंपराओं की झलक पेश करेगी। 7 दिसंबर को मशक मंदिर में महाराज के विराजमान होने के साथ ही वहां उनकी उपस्थिति श्रद्धालुओं की आस्था का नया केंद्र बनेगी।

 

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